22 October 2015

युवाओं के हाथों में सौंपी जानी चाहिए लडभड़ोल की हर पंचायत की बागडोर, जानिए क्यों

लडभड़ोल : एक बार फिर वह मौसम आ गया है । हम यहां बात सर्दी के मौसम की नही, चुनावी मौसम की कर रहे है। वर्तमान हिमाचल सरकार भी हिमाचल पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी नीतियॉ जनता के लिए बना रही है । लडभड़ोल तहसील क्षेत्र के नेतृत्व का प्रश्न है तो हमे यह कभी नही भुलना चाहिये कि लडभड़ोल क्षेत्र को दिशा देना, नई सोच प्रदान करना, युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करना, लोगों मे त्याग की भावना पैदा करना, समाज के प्रति लोगो को उतरदायी बनाना, पंचायत का नेतृत्व करने वालों का ही कार्य है।

युवा पीढ़ी को दिया जाना चाहिए नेतृत्व
जहां तक नेतृत्व के गुणों का प्रश्न है - नेतृत्व वर्तमान प्ररिपेक्ष्य मे देखा जाय तो लडभड़ोल क्षेत्र की सभी पंचायतों सहित पुरे हिमाचल का नेतृत्व युवा पीढ़ी को सौंपा जाना चाहिये क्योंकि यह ध्यान देने योग्य बात है कि गाड़ी बिल्कुल नई और उसके डाईवर की उम्र 65 से 75 वर्ष की उम्र की हो, तो गाड़ी अपना अधिकतम माइलेज कैसे देगी। जिस व्यक्ति का राजनीतिक जीवन अब अन्तिम पड़ाव मे चल रहा हो, वो हमारी अपनी पंचायत को मंजिल तक कैसे पहुँचाएगा यह एक प्रश्न है।

पूरी दुनिया है गवाह
जहां तक युवाओ को समाज का नेतृत्व सौंपने का प्रश्न है, इसकी तो पुरी दुनिया गवाह है वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे ऐसे अनेक उदाहरण है जिससे चाहे वो उद्योंगों मे टाटा ग्रुप के चेयरमेन कि बात हो जिसके लिए 45 वर्ष सायरश मिस्‍़त्री को चुना गया था तथा राष्ट्रों मे अमेरिका, जिसमे हमेशा युवा राष्ट्रपति चुना जाता है यह पिछले 200 वर्षो से हो रहा है, और आज वह दुनिया मे नम्बर एक है। समाज मे एक नयी उर्जा का संचार करने के लिए नये उर्जावान नेतृत्व की आवश्यकता है।

इन पर करना होगा भरोसा
आज लडभड़ोल तहसील की आबादी का अधिकतम प्रतिशत युवा वर्ग है, ऐसी स्थिती मे युवाओं को समझने के लिए, समाज कि बागडोर युवाओ के हाथो मे होनी चाहिये, चाहे वो पंचायत उपप्रधान की कमान किसी युवा उमीदवार के हाथो मे देने का मामला हो, या उप-प्रधान तथा बीडीसी सहित वार्ड पांच के नेतृत्व की बात हो, नेतृत्व युवाओ को दिया जाना चाहिये लेकिन निगरानी वरिष्ट बुद्धिजीवियो द्वारा की जानी चाहिये ताकि समाज की गाड़ी अपना सम्पूर्ण माइलेज दे सके, क्योंकि किसी गाडी़ को चलाने वाला डाइवर जब तक गाड़ी की तरह नया और युवा नहीं होगा तब तक गाड़ी का वास्तविक माइलेज हासिल नहीं किया जा सकता।

यह एक सच्चाई है
यह बुरा मानने कि बात नही है, लेकिन यह एक सच्चाई है कि, आज समाज हो या देश, संस्थाऐ हो या संगठन, सभी का नेतृत्व 60 से 75 वर्षो के लोगो के पास किडनेप है, वो उन पर आधिपत्य जमाये बेठे है । उन्हे आज भी भम्र है कि समाज को हम ही नेतृत्व दे सकते है, उम्र के इस पडा़व मे भी उन्हे यह नही लगता है कि उन्हे अब नेतृत्व कि गद्धी को छोड़कर, समाज कि युवा पीढी़ को बागडोर सोपनी चाहिये, ताकि वो अपनी उर्जा और जोश का उपयोग करते हुए उसकी गति को बढावा दे।

सिद्ध करने के लिए पर्याप्त होता है एक कायर्काल
यह विचारणीय बात है की, किसी भी पद पर एक कार्यकाल किसी भी व्यक्ति को अपने आप को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त होता है, और इसके बाद भी आम जनता यदि नही चाहती, तो भी वह नेतृत्व करना चाहता है तो यह क्या है, ऐसे व्यक्ति द्वारा समाज और देश के साथ अपने आपको थोपने जैसा है, क्या एक कार्यकाल का समय उसे अपने आपको सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नही था, जो वह केवल कुर्सी के लोभ के चक्कर मे उसे पकड़कर बेठाना चाहता है और क्या गारन्टी है कि वो अब कुछ नया कर देगा जो पिछले कार्यकाल मे नही कर पाया, इसकी उम्मीद करना बेमानी है ।

आत्मनिर्भर होना बेहद जरुरी
लडभड़ोल तहसील की सभी पंचायतों के नेृतत्व मे गुणो की बात होगी तो युवा पीढी़ के उच्च शिक्षित व आत्मनिर्भर लोगो को आगे लाये जाने की आवश्यकता है, क्योकि जो स्वयं आत्मनिर्भर नही होगा, वो समाज को क्या आत्मनिर्भर बनायेगा, क्योकि आत्मनिर्भर व्यक्ति ही समाज को दिशा दे सकता है क्योंकि वह हर रोज अपने आपको सफल बनाने के लिए समाज और देश मे अपने आपको रोज सिद्ध करता है ।

सेवानिवृति के बाद विकास की बात करना भ्रामक
जहां तक हमारे सरकारी ऑफिसर व बुद्धिजीवी वर्ग की बात है वो यदि नेतृत्व करना चाहे तो उन्हे सरकारी सेवा मे, ‘‘ इन पावर ‘‘ रहते हुए समाज की सेवा करनी चाहिये ताकि वो अपने पावर, साधन, ज्ञान, उर्जा का उपयोग जिस क्षमता के साथ सरकार के लिये करते है, उसी क्षमता के साथ समाज के लिये कर सके, अन्यथा 60 साल की नौकरी की सेवानिवृति के बाद समाज के विकास कि बात करना, और उसे दिशा देना भ्रामक है क्योंकि सेवानिवृति के बाद उनके सारे हथियार, पावर, उम्र, उर्जा, क्षमता, जोश अन्तिम पड़ाव मे होते है, ऐसे मे समाज के नेतृत्व की बात करना समाज के साथ खिलवाड़ है, जिससे समाज का बहुत ज्यादा भला होने वाला नही है।

ऐसे लोग समाज के नेृतत्व को सम्भालने की बात करते है तो उनके द्वारा सरकारी सेवा मे रहते हुए, समाज के लिए किये गये कार्यो की तरफ सबका ध्यान जाता है, यदि उन्होने कुछ किया है तो उनके कार्यो को ध्यान मे रखते हुए ही उनके साथ समाज के लोग जुड़ते है और समाज के लोग उनका सहयोग करते है। इस दौरान सरकारी सेवा मे रहते हुए समाज के लोगो के प्रति उनका क्या रवैया रहा, यही उनकी सफलता को तय करता है । ऐसी स्थिति मे उनके पूरे करिअर के कार्यकलापो पर लोगो को टिप्पणी करने का मोका मिलता है जिससे नेतृत्व की प्रभावशीलता कम होती है, जबकि युवा नेतृत्व मे यह कमी नही होता है क्योंकि वह नया होता है ।

सिस्टम डवलेप करना होगा
लडभड़ोल क्षेत्र की हर पंचायत का नेतृत्व नये, उर्जावान, युवा, आत्मनिर्भर, त्यागवान, उच्च शिक्षित व्यक्ति के हाथो मे सोपा जाना चाहिये और ऐसे युवा वर्ग को ही समाज के विकास की आंधी बनाया जाना चाहिये, ताकि वो लम्बे समय तक समाज के विकास मे सहयोग दे सके और एक सिस्टम डवलेप हो सके अन्यथा जिस तरह लडभड़ोल में सुविधाओं का पतन हुआ है उसके लिए समाज का उच्च शिक्षित वर्ग ही जिम्मेदार है समाज को दिशा देना या समाज का विकास करना, यह उनकी जिम्मेदारी मे आता है, जिससे वे पीछे नही हट सकते।

युवा पीढ़ी को दें मौका
आज युवा पीढी की बात करे तो लडभड़ोल क्षेत्र की जनसंख्या मे अधिक प्रतिशत युवा पीढी है तथा जनाधार भी देखा जाये तो उनका ही है, कार्यकर्ताओ की संख्या मे भी वे ही अधिक है, आने वाला कल भी उनका ही है, ऐसे मे उनको अनदेखा करना, मेरे मायने मे सही नही है। हमे यह देखना चाहिये की आज हमारी अगली युवा पीढी क्या चाहती है, हमारा मानना है की आज की युवा पीढी, युवा नेतृत्व चाहती है, जो समाज के विकास की गति को बढावा दे।

हमारा पैदा होना व्यर्थ है
हम इतने काबिल बुद्धिमान, साधन सम्पन्न होने के बावजूद समाज को कुछ नही देते है तो इस समाज मे हमारा पैदा होना व्यर्थ है। क्योंकि हमे यह कभी नही भुलना चाहिये की समाज मे पैदा होने, विवाहित होने, मरने के बाद, अन्तिम यात्रा तक समाज से हमने बहुत कुछ पाया है, इसलिए हमे यह सोचना चाहिये की समाज को हमने क्या दिया है ।

Written By Amit Barwal





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