22 October 2015

बड़ी खबर : चुल्ला प्रोजेक्ट में टेस्टिंग के दौरान पानी की पाइप फ़टी, पावर हाउस में घुसा मलबा

ऊहल तृतीय पन विद्युत प्रोजेक्ट के पॉवर हाउस में आधी रात को बड़ा हादसा हो गया। सालों के इंतजार के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे उत्पादन शुरू हुआ था। इस दौरान पैन स्टॉक फटने से पॉवर हाउस को भारी नुकसान पहुंचा है। पावर हाउस में पानी भर जाने से 30 कर्मचारी अंदर फंस गए थे, जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद सुबह के समय रेस्क्यू कर लिया गया है।। परियोजना में उत्पादन शुरू करने के पहले दिन हुए इस हादसे में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

आठ मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू कर सप्लाई हमीरपुर के मट्टन सिद्ध ग्रिड को भेजी जा रही थी। करीब एक घंटे बाद साढ़े 12 बजे इंजीनियरों ने लोड 8 से बढ़ाकर 16 मेगावाट करने के लिए प्रेशर बढ़ाया तो पाॅवर हाउस से 150 मीटर की दूरी पर पैन स्टॉक में ब्लास्ट हो गया। पानी पॉवर हाउस की दीवार को तोड़कर अंदर घुस गया। 15 इंजीनियर व कर्मचारियों ने भाग कर जान बचाई व 15 लोग अंदर फंस गए। पाॅवर हाउस पूरी तरह पानी व मिट्टी से भर गया।

एक इंजीनियर ने हिम्मत दिखाकर पैन स्टॉक का वाल्ब बंद किया। इसके बाद कड़ी मशक्कत से अंदर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। जलभराव व मिट्टी भरने से पॉवर हाउस में करोड़ों रुपये की मशीनरी खराब हो गई है। 8.4 किलोमीटर लंबी पैन स्टॉक में चूला स्थित पॉवर हाउस के नजदीक हादसा हुआ। 100 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट में 33.3 मेगावाट की तीन टरबाइन लगाई गई हैं। टरबाइन एक से बिजली उत्पादन शुरू किया गया था, इंजीनियरों की योजना बिजली उत्पादन को 32 मेगावाट तक ले जाने की थी।

इंजीनियर अरुण ने जान पर खेलकर बचाई जिंदगियां

हादसे के दौरान सब सिग्नल फेल हो चुके थे। ऐसे में इंजीनियर अरुण शर्मा ने साहस का परिचय दिया। उन्होंने खुद की जान जोखिम में डालकर मोबाइल फोन की रोशनी से पहाड़ी पर चढ़ कर पैन स्टॉक का व्हील बंद किया। इसके अलावा पॉवर हाउस में मौजूद इंजीनियरों व कर्मचारियों ने क्रेन पर चढ़ कर जान बचाई।

मेहनत पर पानी फिर गया

प्रोजेक्ट में इलेक्ट्रिकल विंग के अधीक्षण अभियंता अजय विक्रांत ने रात 12 बजे बिजली उत्पादन शुरू होने की जानकारी दैनिक जागरण के साथ साझा की थी। उन्होंने कहा हमारी मेहनत पर पानी फिर गया। 15 लोगों ने बड़ी मुश्किल से जान बचाई, अगर व्हील बंद नहीं किया होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

पहले भी हो चुके हैं हादसे

पैन स्टॉक फेल होने की घटनाओं से हिमाचल के प्रोजेक्टों में पहले भी तबाही मच चुकी है। किन्नौर सोरंग पॉवर हाउस, माइक्रो पॉवर हाउस कुल्लू में भी ऐसे हादसे हुए हैं। स्टील के बने पैन स्टॉक पानी के प्रेशर के आगे फेल हुए हैं।

टेस्टिंग के दौरान भी हुआ था रिसाव

प्रोजेक्ट का काम करीब एक साल पहले पूरा हो गया था। इसके बाद जलभराव व टेस्टिंग शुरू हुई थी। टेस्टिंग के दौरान पेन स्टॉक व जलाशय में रिसाव हुआ था। कई माह तक मरम्मत का काम चला। जलाशय का रिसाव रोकने के लिए सिंगापुर से केमिकल मंगवाया गया था। पेन स्टॉक का रिसाव दूर करने के लिए कई माह तक वेल्डिंग का काम चला था।

अनुमान से कहीं अधिक हुआ खर्च

प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में बरती गई कोताही का मामला दैनिक जागरण ने कई बार प्रमुखता से उठाया था। मौजूदा समय में एक मेगावाट क्षमता के बिजली प्रोजेक्ट के निर्माण पर 10 करोड़ रुपये खर्च आता है। इसमें भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य व उपकरण शामिल रहते हैं। उस हिसाब से 100 मेगावाट प्रोजेक्ट पर 1000 करोड़ खर्च होने चाहिए थे। 13 साल पहले एक मेगावाट पर 4 करोड़ खर्च आता था। लेकिन इस परियोजना के निर्माण पर 1645 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है।

इस प्रोजेक्ट का सपना ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बीसी बैटी ने 1927 में देखा था। सबसे पहले उनकी देखरेख में बरोट से ऊहल नदी का पानी जोगेंद्रनगर के शानन पहुंचा, शानन प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया था।









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