22 October 2015

20 वर्ष में 1800 करोड़ खर्चे, फिर पूरा हुआ चुल्ला प्रोजेक्ट, इसी महीने शुरू होगा बिजली उत्पादन

लडभड़ोल : ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बीसी बैटी अब इस दुनिया में नहीं है। करीब 92 साल पहले उन्होंने उहल तृतीय पनविद्युत प्रोजेक्ट के निर्माण का सपना देखा था। देर से ही सही, मगर सोमवार को उनका सपना साकार हो गया। 100 मेगावाट क्षमता की ऊहल तृतीय पनविद्युत प्रोजेक्ट के यूनिट एक (टरबाइन) का मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल टेस्ट सफल रहा। प्रोजेक्ट में इलेक्ट्रिकल विंग के अधिकारी व कर्मचारी खुशी से झूम उठे। उन्होंने कर्नल बीसी बैटी को पुष्पांजलि भेंट की।

कर्नल बीसी बैटी का था ख्वाब
पहली बार पावर हाउस तक जलाशय का पानी पहुंचा। दोनों टेस्ट सफलतापूर्वक होने से प्रोजेक्ट में इसी माह बिजली उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है। उहल नदी से पानी से कर्नल बीसी बैटी ने जोगेंद्रनगर उपमंडल में तीन पनविद्युत प्रोजेक्ट बनाने का खाका खींचा था। बरोट में बांध बनाकर उहल का पानी जोगेंद्रनगर के शानन पहुंचा गया था। यहां विक्ट परिस्थितियों में अल्प समय में शानन प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया था।

टेस्ट रन हुआ सफल
दूसरे चरण में शानन प्रोजेक्ट से निकले पानी से बस्सी में 66 मेगावाट का प्रोजेक्ट स्थापित किया गया था।तृतीय चरण में चूल्हा में 100 मेगावाट का प्रोजेक्ट प्रस्तावित था। करीब एक साल से विभिन्न तकनीकी कारणों से टरबाइन का मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल रन टेस्ट टल रहा था। टेस्ट करने से पहले इलेक्ट्रिकल विंग के अधिकारियों ने पावर हाउस में अधीक्षक अभियंता अजय विक्रांत की अगुआई में मशीनरी की पूजा अर्चना की।

इसी महीने शुरू होगा उत्पादन
प्रोजेक्ट में 33.33 मेगावाट की तीन टरबाइन लगाई गई हैं। पहले चरण यूनिट एक से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। ऊहल तृतीय पनविद्युत प्रोजेक्ट के अधीक्षण अभियंता अजय विक्रांत ने कहा की ऊहल तृतीय पनविद्युत प्रोजेक्ट के युनिट एक का पहली बार सोमवार को पानी से मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल रन टेस्ट किया गया। टेस्ट सफल रहा है । इसी माह प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन शुरू होगा।





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