22 October 2015

Breaking :लडभड़ोल में शौचालय निर्माण के लिए सामने आये कुछ युवा, चलाया हस्ताक्षर अभियान

लडभड़ोल : इसे शायद लडभड़ोल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आजादी के 72 वर्ष बाद भी यहाँ की जनता अपने हक के लिए संघर्ष कर रही है। वैसे तो देश में महिलाओं की सुरक्षा व अस्मिता को लेकर तरह के पाखंड किए जा रहे हैं, लेकिन यहाँ महिलाओं के हकों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है।

युवाओं ने उठाया मुद्दा
वीरवार को लडभड़ोल क्षेत्र के कुछ युवाओं ने लडभड़ोल के मुख्य बाजार में शौचालय का निर्माण करने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया। दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लडभड़ोल में शौचालय न होने का मुद्दा उठाया जा रहा था। इसी मुद्दे को आगे उठाते हुए लडभड़ोल तहसील के कुछ युवा बाजार में इक्क्ठा हुआ और मुख्य बाजार में आये हुए लोगों से शौचालय निर्माण के लिए हस्ताक्षर करवाए गए। इस हस्ताक्षर अभियान में अर्जुन बड़वाल, रियाज खान, हैदर अली, जोगिंदर सिंह, बलराम, साबिर खान, बलवंत ठाकुर, मुनीश कुमार व रवि पराशर मौजूद रहे। इसके बाद इन्होने तहसीलदार के माध्यम विधायक प्रकाश राणा व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपा।

18 पंचायतों के सैकड़ों लोगों को परेशानी
सौंपे गए ज्ञापन में इन युवाओं ने लिखा है की विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसे लडभड़ोल बाजार में आजतक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पायी है। लडभड़ोल बाजार में अभी अब तक शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय दुकानदारों व बाहर से आने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। लडभड़ोल तहसील मुख्यालय होने के कारण यहां क्षेत्र की 18 पंचायतों के सैकड़ों लोग अपने रोजमर्रा का कार्य करवाने के लिए आते हैं। लेकिन शौचालय की व्यवस्था न होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई सरकारें आयी व गई , कई पंचायतें बदली लेकिन सभी इस समस्या को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए है।

महिलाओं व लड़कियों की प्रतिष्ठा दांव पर
शौचालय न होने के कारण यहाँ आने वाले लोगों खासकर महिलाओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुरुष तो जैसे तैसे काम निपटा लेते है परंतु महिलाएं परेशानी में जल्द से जल्द काम निपटा घर को लौटने को मजबूर हो जाती है। एक तरफ तो राज्य व केंद्र सरकार पुरे जोर शोर से घर-घर शौचालय बनवा रही है, वही दूसरी तरफ लडभड़ोल के प्रमुख बाजार में शौचालय के आभाव में लोगो को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। कितनी हैरानी की बात है कि शौचालय की कमी की वजह से महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान और उन का विकास सबकुछ दांव पर लग जाता है। तहसीलदार के माध्यम से सौंपे गए इस ज्ञापन में लगभग 200 लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए है। युवाओं ने प्रशासन से मांग की है की जल्द से जल्द लडभड़ोल बाजार में शौचालय का निर्माण किया जाये ताकि लोगों को दिक्क्तों का सामना न करने पड़े अन्यथा यह लोग भविष्य में भारी प्रदर्शन करने से गुरेज़ नहीं करेंगे

सार्वजनिक क्षेत्र में शौचालय उपलब्ध करवाना सरकार की जिमेवारी
सार्वजनिक शौचालय महिलाओं की स्वाभाविक व मानवीय जरूरत है। यह बात समझना जरूरी है कि घरों के भीतर शौचालय जहां किसी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है वहीं सार्वजनिक क्षेत्र, चाहे वह बाजार हो या आफिस में इस सुविधा को उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। अब यह सवाल उठता है कि लडभड़ोल जैसे बाजार पर महिलाओं की इस आधारभूत जरूरत की तरफ सरकार का ध्यान क्यों नहीं जाता..? सरकार आखिर क्यों लडभड़ोल के लोगों की इस मूलभूत समस्या से पूरी अनजान बनी हुई है।

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