22 October 2015

बस का नहीं कोई भरोसा, कई किलोमटेर पैदल चलकर घर पहुँचते है स्कूली बच्चे, देखें वीडियो

लडभड़ोल : लडभड़ोल क्षेत्र में स्कूल जाने के लिए बच्चों को किन-किन मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ता है यह आपने कई बार देखा और सुना होगा। आपके अपने माता-पिता या दादा-दादी ने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए अपनी कहानी में इस बात जिक्र किया होगा कि वह किस तरह पैदल चलकर कर स्कूल जाते थे। यह बात अगर 50 साल पुरानी हो तो ठीक लगती है। क्योंकि उस समय ना तो इतने स्कूल थे और ना ही अच्छी सड़कें।

14 किलोमटेर तक पैदल चले बच्चे
लेकिन आज के समय में यदि ऐसा कुछ देखने को मिले तो हमारा हैरान होना स्वाभाविक है। लडभड़ोल क्षेत्र के एक गांव का स्कूल से घर जाने वाले बच्चों का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में बच्चे मक्रीडी से अपने गांव तक 14 किलोमटेर तक पैदल चलने की बात बता रहे है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बस न आने पर किस प्रकार बच्चे अंधेरा होने के बाद भी अभी तक घर नहीं पहुंचे है

विरोध करने पर भेजा गया ड्राइवर
इस वीडियो में बच्चों ने अपनी स्कूल की वर्दी भी पहन रखी है। यह वीडियो सोमवार रात को गदयाडा गांव के आसपास बनाया गया है। बच्चों ने बताया कि सोमवार शाम को जोगिंदरनगर से त्रेम्बली कोलंग जाने वाली बस जोगिंदरनगर बस अड्डे पर खड़ी तो थी लेकिन काफी देर तक ड्राइवर नहीं आया। जब इन बच्चों ने एचआरटीसी कार्यलय में इस बारे में पूछताछ की तो जबाब मिला की बस का ड्राइवर बीमार है और वह दूसरे ड्राइवर का इंतजार कर रहे हैं। काफी देर बाद जब जब स्कूली और कॉलेज के बच्चों ने विरोध शुरू किया तो आनन-फानन में एक ड्राइवर भेजा गया।

कई बार होते है परेशान
वहीं मकरीडी से कोलंग की तरफ इस बस में रोज़ाना सफर करने वाले स्कूली बच्चे सोमवार को काफी देर तक बस के निर्धारित समय पर इंतज़ार करते रहे लेकिन बस लेट होने के चलते वह पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े। लगभग 14 किलोमटेर तक पैदल चलने के बाद वह अँधेरे में घर पहुंचे। बच्चों का कहना है की आये दिन उन्हें इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी अन्य रूट में बस खराब होने पर कोलंग रूट की बस को वहां भेज दिया जाता है। इससे कोलंग जाने वाले यात्री परेशानी उठाते है।

लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है की इस बस को नियमित किया जाये ताकि लोगों व स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

देखें वीडियो :





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